Ration Card राशन कार्ड आज भारत में सामाजिक सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। विशेषकर झारखंड जैसे राज्य में, जहां बड़ी आबादी गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करती है, राशन कार्ड से मिलने वाले लाभ परिवारों के लिए जीवनदायिनी साबित होते हैं। हाल ही में, झारखंड सरकार ने राशन वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने और धोखाधड़ी को रोकने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है – सभी राशन कार्ड धारकों के लिए ई-केवाईसी (इलेक्ट्रॉनिक नो योर कस्टमर) अनिवार्य कर दिया है।
ई-केवाईसी क्या है और क्यों है महत्वपूर्ण?
ई-केवाईसी एक डिजिटल प्रक्रिया है जिसके माध्यम से राशन कार्ड धारकों की पहचान आधार कार्ड के साथ सत्यापित की जाती है। इस प्रक्रिया में राशन कार्ड धारक के बायोमेट्रिक डेटा (अंगूठे का निशान या आंखों की स्कैनिंग) और आधार नंबर का उपयोग करके उनकी पहचान सुनिश्चित की जाती है। यह प्रक्रिया फर्जी राशन कार्डों पर अंकुश लगाने, डुप्लीकेट कार्डों को हटाने और वास्तविक लाभार्थियों को सही सेवाएं प्रदान करने में मदद करती है।
ई-केवाईसी का महत्व इस बात से समझा जा सकता है कि इससे सरकारी योजनाओं के लाभ सीधे वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचते हैं और बिचौलियों द्वारा किए जाने वाले भ्रष्टाचार पर रोक लगती है। साथ ही, डिजिटल सत्यापन से राशन वितरण प्रणाली अधिक कुशल और पारदर्शी बनती है।
झारखंड में राशन कार्ड की वर्तमान स्थिति
झारखंड के खाद्य आपूर्ति विभाग के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में कुल 68 लाख 21 हजार 60 राशन कार्डधारी परिवार हैं। ये राशन कार्ड विभिन्न श्रेणियों में बंटे हुए हैं, जिनमें प्रमुख हैं:
- पीएच (गुलाबी कार्ड) – अंत्योदय अन्न योजना के तहत अति गरीब परिवारों के लिए
- एएवाई (पीला कार्ड) – प्राथमिकता प्राप्त परिवारों के लिए
- हरा राशन कार्ड – सामान्य श्रेणी के परिवारों के लिए
- अन्य राशन कार्डधारी परिवार
इन सभी श्रेणियों के कार्ड धारकों को ई-केवाईसी कराना अनिवार्य किया गया है। वर्तमान में, 56 लाख 56 हजार 411 कार्डधारियों का ई-केवाईसी पूरा हो चुका है, लेकिन अभी भी 11 लाख 64 हजार 649 राशन कार्ड धारकों का ई-केवाईसी बाकी है।
ई-केवाईसी के लिए समय सीमा और चुनौतियां
झारखंड सरकार ने राशन कार्ड धारकों के लिए ई-केवाईसी कराने की अंतिम तिथि 28 फरवरी 2025 निर्धारित की है। यह देखते हुए कि अभी भी 11 लाख से अधिक कार्डधारियों का ई-केवाईसी बाकी है, यह एक बड़ी चुनौती है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में, जहां तकनीकी और बुनियादी ढांचे की समस्याएं अधिक हैं, इस लक्ष्य को प्राप्त करना और भी कठिन हो सकता है।
ई-केवाईसी प्रक्रिया में आ रही प्रमुख समस्याएं निम्नलिखित हैं:
1. तकनीकी बाधाएं
- सर्वर समस्याएं: अक्सर सर्वर धीमा या डाउन होने से ई-केवाईसी प्रक्रिया बाधित होती है।
- नेटवर्क कनेक्टिविटी: दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की खराब कनेक्टिविटी ई-केवाईसी प्रक्रिया को धीमा कर देती है।
- बिजली की समस्या: कई क्षेत्रों में बिजली की अनियमित आपूर्ति के कारण ई-केवाईसी केंद्र प्रभावी ढंग से काम नहीं कर पाते।
2. जागरूकता और पहुंच संबंधी मुद्दे
- जागरूकता की कमी: कई ग्रामीण क्षेत्रों में, विशेष रूप से आदिवासी बहुल इलाकों में, ई-केवाईसी की आवश्यकता के बारे में जागरूकता की कमी है।
- केंद्रों तक पहुंच: ग्रामीण क्षेत्रों में ई-केवाईसी केंद्रों तक पहुंचना, विशेष रूप से बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए, एक बड़ी चुनौती है।
3. प्रमाणीकरण संबंधी समस्याएं
- बायोमेट्रिक विफलता: कई मैनुअल श्रमिकों और बुजुर्गों के अंगूठे के निशान स्पष्ट नहीं होते, जिससे बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण विफल हो जाता है।
- आधार-राशन कार्ड लिंकेज: कई लोगों के आधार कार्ड उनके राशन कार्ड से ठीक से लिंक नहीं हैं, जिससे ई-केवाईसी में समस्या आती है।
- नाम और पता विवरण में विसंगतियां: आधार कार्ड और राशन कार्ड में नाम या पते की विसंगतियां ई-केवाईसी प्रक्रिया को बाधित करती हैं।
ई-केवाईसी न कराने के परिणाम
सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि 28 फरवरी 2025 तक ई-केवाईसी न कराने वाले राशन कार्ड धारकों को गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है:
- राशन कार्ड निरस्तीकरण: ई-केवाईसी न कराने वाले लाभार्थियों के राशन कार्ड निरस्त किए जा सकते हैं या उनके नाम राशन कार्ड से हटाए जा सकते हैं।
- लाभों से वंचित होना: उन्हें राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम और राज्य खाद्य सुरक्षा योजना के तहत मिलने वाले लाभों से वंचित किया जा सकता है।
- अन्य सरकारी योजनाओं से बहिष्करण: ई-केवाईसी न कराने से अन्य सरकारी योजनाओं, जैसे प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, आदि से लाभ लेने में भी समस्याएं आ सकती हैं।
इन परिणामों के मद्देनजर, सभी राशन कार्ड धारकों के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि वे निर्धारित समय सीमा से पहले अपना ई-केवाईसी करा लें।
ई-केवाईसी कैसे कराएं?
ई-केवाईसी कराने के लिए राशन कार्ड धारकों को निम्नलिखित चरणों का पालन करना होगा:
1. आवश्यक दस्तावेज तैयार करें
- राशन कार्ड (मूल प्रति)
- आधार कार्ड (मूल प्रति)
- मोबाइल नंबर (जो आधार से लिंक हो)
- परिवार के सभी सदस्यों के आधार कार्ड
2. ई-केवाईसी केंद्र पर जाएं
झारखंड सरकार ने ई-केवाईसी के लिए विभिन्न केंद्र स्थापित किए हैं:
- जन सेवा केंद्र (CSC)
- प्रज्ञा केंद्र
- राशन दुकानें (जहां यह सुविधा उपलब्ध है)
- मोबाइल ई-केवाईसी वैन (जो विभिन्न गांवों में जाती हैं)
3. ई-केवाईसी प्रक्रिया
- अपने दस्तावेज दिखाएं और आवेदन फॉर्म भरें
- अपना बायोमेट्रिक डेटा (अंगूठे का निशान या आइरिस स्कैन) प्रदान करें
- सत्यापन के बाद, आपको ई-केवाईसी पूरा होने का प्रमाण मिलेगा
सरकार द्वारा उठाए गए कदम
झारखंड सरकार ई-केवाईसी प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने के लिए कई कदम उठा रही है:
- मोबाइल ई-केवाईसी वैन: दूरदराज के क्षेत्रों में ई-केवाईसी सुविधा पहुंचाने के लिए मोबाइल वैन चलाई जा रही हैं।
- विशेष शिविर: विभिन्न प्रखंडों और पंचायतों में विशेष ई-केवाईसी शिविर आयोजित किए जा रहे हैं।
- जागरूकता अभियान: ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने के लिए अभियान चलाए जा रहे हैं।
- हेल्पलाइन नंबर: समस्याओं के समाधान के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं।
ई-केवाईसी झारखंड सरकार का एक महत्वाकांक्षी कदम है, जिसका उद्देश्य राशन वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी और कुशल बनाना है। यह सुनिश्चित करता है कि सरकारी योजनाओं के लाभ वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचें और सिस्टम में धोखाधड़ी कम हो। हालांकि, इस प्रक्रिया में कई चुनौतियां हैं, विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में।
सभी राशन कार्ड धारकों को सलाह दी जाती है कि वे 28 फरवरी 2025 की समय सीमा से पहले अपना ई-केवाईसी अवश्य करा लें, ताकि वे खाद्य सुरक्षा योजनाओं और अन्य सरकारी लाभों से वंचित न रहें। ई-केवाईसी न केवल सरकार के लिए, बल्कि नागरिकों के लिए भी फायदेमंद है, क्योंकि यह उन्हें बिना किसी बाधा के अपने अधिकारों का उपयोग करने में सक्षम बनाता है।
सरकार और नागरिकों के बीच बेहतर सहयोग से ही इस महत्वपूर्ण पहल को सफल बनाया जा सकता है, जिससे झारखंड के विकास और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होगा।