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चेक बाउंस होने पर इतने साल तक मिलेगी सजा, लागू हुए नए नियम cheque bounces

cheque bounces बैंकिंग सेवाओं के विस्तार के साथ-साथ, आज के समय में लगभग हर नागरिक के पास बैंक खाता होना अनिवार्य सा हो गया है। बैंक खाते के माध्यम से हम वित्तीय लेनदेन को सुरक्षित और आसान बना पाते हैं। बैंक खाता खोलने के बाद आपको एटीएम कार्ड और चेक बुक प्रदान की जाती है, जिसके माध्यम से आप अपनी आवश्यकताओं के अनुसार धन का आदान-प्रदान कर सकते हैं। हालांकि, चेक के माध्यम से लेनदेन करते समय कुछ महत्वपूर्ण नियमों और कानूनी प्रावधानों का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है, अन्यथा आप गंभीर परिस्थितियों का सामना कर सकते हैं।

चेक बाउंस क्या है?

चेक बाउंस तब होता है जब चेक जारी करने वाले व्यक्ति के बैंक खाते में पर्याप्त धनराशि न होने के कारण या अन्य तकनीकी कारणों से बैंक द्वारा चेक का भुगतान नहीं किया जाता है। यह एक गंभीर वित्तीय अपराध माना जाता है और इसके लिए कानूनी प्रावधान भी हैं। चेक बाउंस के कारण न केवल आपकी वित्तीय साख प्रभावित हो सकती है, बल्कि यह आपके लिए कानूनी समस्याएं भी पैदा कर सकता है।

चेक बाउंस के प्रमुख कारण

  1. अपर्याप्त धनराशि: खाते में पर्याप्त राशि न होना चेक बाउंस का सबसे आम कारण है।
  2. हस्ताक्षर मेल न खाना: अगर चेक पर किए गए हस्ताक्षर बैंक के रिकॉर्ड में मौजूद हस्ताक्षर से मेल नहीं खाते हैं।
  3. चेक पर अस्पष्ट लिखावट: अगर चेक पर लिखी गई जानकारी अस्पष्ट या अपठनीय है।
  4. चेक का समाप्त हो जाना: अगर चेक की वैधता समाप्त हो गई है (आमतौर पर 3 महीने)।
  5. खाता बंद होना: अगर चेक जारी करने वाले का खाता बंद हो चुका है।
  6. स्टॉप पेमेंट निर्देश: अगर चेक जारी करने वाले ने बैंक को स्टॉप पेमेंट का निर्देश दिया हो।

चेक बाउंस से जुड़े कानूनी प्रावधान

भारत में चेक बाउंस को परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 (Negotiable Instrument Act, 1881) के अंतर्गत विनियमित किया जाता है। इस अधिनियम की धारा 138 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति अपने बैंक खाते से भुगतान के लिए चेक जारी करता है और वह चेक अपर्याप्त धनराशि या अन्य कारणों से अस्वीकृत हो जाता है, तो वह व्यक्ति दंडात्मक कार्रवाई का भागीदार हो सकता है।

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धारा 138 के अंतर्गत कार्रवाई के लिए आवश्यक शर्तें:

  1. चेक ऋण या देयता के निर्वहन के लिए जारी किया गया हो: चेक किसी कानूनी देयता या ऋण के भुगतान के लिए जारी किया गया होना चाहिए।
  2. चेक प्रस्तुत करने की समय सीमा: चेक को उसके जारी होने की तिथि से 3 महीने के भीतर बैंक में प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
  3. बाउंस की सूचना: चेक प्राप्तकर्ता को चेक बाउंस होने के 30 दिनों के भीतर चेक जारीकर्ता को लिखित नोटिस देना अनिवार्य है।
  4. भुगतान न करना: नोटिस प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर भी यदि चेक जारीकर्ता ने राशि का भुगतान नहीं किया है, तो कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
  5. शिकायत दर्ज करने की समय सीमा: नोटिस देने के 15 दिन बाद और अगले 30 दिनों के भीतर न्यायालय में शिकायत दर्ज की जानी चाहिए।

चेक बाउंस पर दंड और सजा

चेक बाउंस के मामले में दोषी पाए जाने पर निम्नलिखित दंड का प्रावधान है:

  1. कारावास: अधिकतम 2 वर्ष तक की जेल की सजा हो सकती है।
  2. आर्थिक दंड: जुर्माना चेक की राशि से दोगुना तक हो सकता है।
  3. दोनों: कुछ मामलों में दोनों सजाएं एक साथ भी दी जा सकती हैं।

साथ ही, दोषी व्यक्ति को मूल राशि पर ब्याज का भुगतान भी करना पड़ सकता है, और कानूनी प्रक्रिया के दौरान होने वाले खर्च भी वहन करने पड़ सकते हैं।

चेक बाउंस से बचने के उपाय

  1. पर्याप्त बैलेंस सुनिश्चित करें: चेक जारी करने से पहले अपने खाते में पर्याप्त धनराशि होना सुनिश्चित करें।
  2. चेक की जानकारी स्पष्ट लिखें: चेक पर सभी आवश्यक जानकारी स्पष्ट और सही तरीके से लिखें।
  3. सही हस्ताक्षर करें: सुनिश्चित करें कि आपके हस्ताक्षर बैंक रिकॉर्ड में मौजूद हस्ताक्षर से मेल खाते हैं।
  4. पोस्ट-डेटेड चेक का ध्यान रखें: यदि आप पोस्ट-डेटेड चेक जारी करते हैं, तो उस तिथि को आपके खाते में पर्याप्त धनराशि होना सुनिश्चित करें।
  5. खाता विवरण नियमित जांचें: अपने बैंक खाते का विवरण नियमित रूप से जांचें और ट्रांजेक्शन का रिकॉर्ड रखें।
  6. ऑनलाइन बैंकिंग का उपयोग करें: जहां संभव हो, ऑनलाइन बैंकिंग, NEFT, RTGS, या UPI जैसे इलेक्ट्रॉनिक भुगतान विकल्पों का उपयोग करें।

चेक बाउंस होने पर क्या करें?

यदि आपके द्वारा जारी किया गया चेक बाउंस हो जाता है, तो निम्नलिखित कदम उठाएं:

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  1. तुरंत संपर्क करें: चेक प्राप्तकर्ता से तुरंत संपर्क करें और स्थिति का स्पष्टीकरण दें।
  2. राशि का भुगतान करें: जितनी जल्दी हो सके, देय राशि का भुगतान करें, अधिमानतः 30 दिनों के भीतर, जिससे आप कानूनी कार्रवाई से बच सकें।
  3. नोटिस का जवाब दें: यदि आपको कानूनी नोटिस प्राप्त होता है, तो 15 दिनों के भीतर उसका जवाब अवश्य दें।
  4. कानूनी सलाह लें: यदि आवश्यक हो, तो एक अनुभवी वकील से सलाह लें जो चेक बाउंस मामलों में विशेषज्ञता रखता हो।

डिजिटल भुगतान का बढ़ता महत्व

आज के डिजिटल युग में, भुगतान के कई वैकल्पिक तरीके उपलब्ध हैं जो चेक की तुलना में अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक हैं। NEFT, RTGS, IMPS, UPI, और मोबाइल वॉलेट जैसे इलेक्ट्रॉनिक भुगतान विकल्प तत्काल और सुरक्षित लेनदेन की सुविधा प्रदान करते हैं। इन विकल्पों का उपयोग करने से चेक बाउंस जैसी समस्याओं से बचा जा सकता है।

चेक एक महत्वपूर्ण वित्तीय उपकरण है, लेकिन इसका उपयोग सावधानी से करना चाहिए। चेक बाउंस न केवल वित्तीय नुकसान का कारण बन सकता है, बल्कि यह आपकी प्रतिष्ठा को भी प्रभावित कर सकता है और कानूनी समस्याएं पैदा कर सकता है। चेक जारी करते समय सभी आवश्यक सावधानियां बरतें और सुनिश्चित करें कि आपके खाते में पर्याप्त धनराशि है। साथ ही, वित्तीय लेनदेन के लिए डिजिटल भुगतान विकल्पों का उपयोग करने पर विचार करें, जो अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक हैं।

यह जानना महत्वपूर्ण है कि वित्तीय मामलों में जागरूकता और सतर्कता आपको कानूनी और वित्तीय समस्याओं से बचा सकती है। चेक बाउंस से संबंधित नियमों और प्रावधानों की समझ आपको जिम्मेदार वित्तीय निर्णय लेने में मदद करेगी। अपने वित्तीय लेनदेन को सुरक्षित और पारदर्शी बनाएं, और किसी भी अस्पष्टता की स्थिति में बैंक अधिकारियों या वित्तीय सलाहकारों से परामर्श करें।

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