Advertisement

EPFO का नया फैसला! प्राइवेट कर्मचारियों को मिलेगा ज्यादा पेंशन, ऐसे होगा बदलाव EPFO’s new decision

EPFO’s new decision भारत में लाखों कर्मचारियों के लिए रिटायरमेंट के बाद जीवन की गुणवत्ता का आधार कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) द्वारा संचालित योजनाएँ हैं। इनमें से एक महत्वपूर्ण योजना है एम्प्लॉयीज पेंशन स्कीम (EPS-95), जिसे 1995 में शुरू किया गया था। इस योजना का मुख्य उद्देश्य निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद एक निश्चित मासिक पेंशन प्रदान करना था, ताकि उन्हें आर्थिक सुरक्षा मिल सके।

परंतु आज, तीन दशक बाद, इस योजना के लाभार्थी एक गंभीर संकट से गुजर रहे हैं। वर्तमान में दी जाने वाली न्यूनतम पेंशन ₹1,000 प्रति माह है, जो आज की महंगाई के दौर में एक व्यक्ति के जीवनयापन के लिए अत्यंत अपर्याप्त है। देश भर में लगभग 36.6 लाख पेंशनर्स ऐसे हैं, जिन्हें ₹1,000 से भी कम राशि मिलती है। इस परिस्थिति ने एक आंदोलन को जन्म दिया है, जिसका उद्देश्य है पेंशन की न्यूनतम राशि बढ़ाकर जीवनयापन योग्य बनाना।

EPS-95 का विकास: एक ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य

EPS-95 की स्थापना से पहले, भारत में एक व्यापक पेंशन योजना का अभाव था। 1952 में EPFO की स्थापना के बाद, कर्मचारियों के लिए भविष्य निधि का प्रावधान तो था, लेकिन एक निश्चित पेंशन का नहीं। 1995 में, सरकार ने इस कमी को दूर करने के लिए EPS-95 को शुरू किया, जिसका उद्देश्य था कर्मचारियों को उनके रिटायरमेंट के बाद एक निश्चित आय सुनिश्चित करना।

Also Read:
बड़ी खुशखबरी! 1 अप्रैल से सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल, राज्य सरकार ने जारी किया आदेश, जानें क्या है नई रेट? Petrol Diesel Price:

इस योजना के तहत, कर्मचारी और नियोक्ता दोनों अपने वेतन का 12% योगदान देते हैं। इसमें से 8.33% पेंशन योजना में और 3.67% भविष्य निधि में जमा होता है। यह प्रणाली कर्मचारियों के रिटायरमेंट के बाद की आर्थिक सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए तैयार की गई थी।

हालांकि, समय के साथ, इस योजना में कई संशोधन हुए, लेकिन न्यूनतम पेंशन राशि में वृद्धि बहुत कम रही। 2014 में, सरकार ने न्यूनतम पेंशन को ₹1,000 प्रति माह किया, जो पिछले एक दशक से अपरिवर्तित है। इस बीच, महंगाई दर में लगातार वृद्धि होती रही, जिससे इस राशि का वास्तविक मूल्य और भी कम हो गया है।

वर्तमान चुनौतियां: पेंशनर्स के सामने आर्थिक संकट

आज के आर्थिक परिदृश्य में, ₹1,000 की मासिक पेंशन से जीवनयापन करना लगभग असंभव है। महंगाई बढ़ने के साथ-साथ, आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें भी बढ़ी हैं। विशेष रूप से चिकित्सा खर्च, जो वृद्धावस्था में अधिक होते हैं, इस सीमित आय से पूरे नहीं हो पाते।

Also Read:
या दिवशी शेतकऱ्यांना मिळणार 19व्या हप्त्याचे 4000 हजार रुपये. 19th installment

आंकड़े बताते हैं कि 36.6 लाख पेंशनर्स को ₹1,000 से भी कम पेंशन मिलती है, जिससे उनकी स्थिति और भी दयनीय हो जाती है। इनमें से अधिकांश ऐसे लोग हैं जिन्होंने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा देश के विकास में योगदान दिया है, लेकिन आज वे आर्थिक असुरक्षा का सामना कर रहे हैं।

इसके अलावा, EPS-95 के तहत पेंशन राशि में महंगाई भत्ता (DA) जैसे प्रावधान का अभाव है, जिससे बढ़ती महंगाई का असर पेंशनर्स पर सीधे पड़ता है। सरकारी पेंशनर्स को DA का लाभ मिलता है, लेकिन EPS-95 के लाभार्थियों को यह सुविधा नहीं है, जिससे एक असमानता पैदा होती है।

आंदोलन का उदय: EPS-95 राष्ट्रीय आंदोलन समिति

इन समस्याओं के समाधान के लिए, EPS-95 के पेंशनर्स ने एक राष्ट्रीय आंदोलन समिति का गठन किया है। इस समिति ने पेंशन सुधार के लिए एक व्यापक प्रस्ताव तैयार किया है, जिसमें निम्नलिखित प्रमुख मांगें शामिल हैं:

Also Read:
पहला लोन चुकाए बिना क्या दूसरा लोन मिलेगा? जानिए पूरी जानकारी Loan EMI Bounce
  1. न्यूनतम पेंशन में वृद्धि: पेंशन की न्यूनतम राशि को ₹1,000 से बढ़ाकर ₹7,500 प्रति माह करने की मांग। यह राशि वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों में एक सम्मानजनक जीवनयापन के लिए आवश्यक मानी गई है।
  2. महंगाई भत्ता: पेंशन राशि में महंगाई भत्ता जोड़ने की मांग, ताकि बढ़ती महंगाई का असर पेंशनर्स पर कम हो सके।
  3. मुफ्त चिकित्सा सुविधा: पेंशनर्स के लिए मुफ्त चिकित्सा सेवाओं का प्रावधान, क्योंकि वृद्धावस्था में स्वास्थ्य संबंधी खर्च बढ़ जाते हैं।

इस आंदोलन ने देशभर में समर्थन हासिल किया है, और कई राजनीतिक दलों ने भी इसका समर्थन किया है। पेंशनर्स के प्रतिनिधियों ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की और अपनी मांगों को रखा, जिस पर उन्होंने सकारात्मक विचार करने का आश्वासन दिया है।

यूनियनों और स्टेकहोल्डर्स के बीच मतभेद

हालांकि, इस मुद्दे पर सभी ट्रेड यूनियनों और स्टेकहोल्डर्स के बीच एकमत नहीं है। कुछ ट्रेड यूनियनों ने न्यूनतम पेंशन को ₹5,000 प्रति माह करने का सुझाव दिया है, जबकि EPS-95 समिति इसे अपर्याप्त मानकर खारिज कर चुकी है।

EPFO के भीतर भी, इस प्रस्ताव पर विभिन्न विचार हैं। कुछ अधिकारियों का मानना है कि इतनी बड़ी वृद्धि से EPFO पर वित्तीय दबाव बढ़ेगा, जबकि अन्य मानते हैं कि यह पेंशनर्स के जीवन स्तर को सुधारने के लिए आवश्यक है।

Also Read:
जिओ ने लांच किए अपने सस्ते रिचार्ज प्लान अब मिलेगा अनलिमिटेड कालिंग के साथ OTT का मजा Jio Recharge New Plan 2025

सरकार की चिंता यह है कि अगर पेंशन राशि बढ़ती है, तो इसका प्रभाव EPFO के वित्तीय स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। इसलिए, एक संतुलित समाधान खोजना आवश्यक है, जो पेंशनर्स की जरूरतों को पूरा करे और साथ ही EPFO की दीर्घकालिक स्थिरता को भी सुनिश्चित करे।

संभावित लाभ: पेंशन वृद्धि के परिणाम

अगर EPS-95 समिति की मांगें स्वीकार की जाती हैं, तो इससे पेंशनर्स को कई लाभ होंगे:

  1. बेहतर जीवन स्तर: ₹7,500 की न्यूनतम मासिक पेंशन से पेंशनर्स अपनी बुनियादी जरूरतों को आसानी से पूरा कर पाएंगे, जिससे उनका जीवन स्तर बेहतर होगा।
  2. आर्थिक सुरक्षा: बढ़ी हुई पेंशन से पेंशनर्स को वित्तीय सुरक्षा मिलेगी, और वे अपने परिवार पर बोझ बनने से बच सकेंगे।
  3. स्वास्थ्य देखभाल में सुधार: मुफ्त चिकित्सा सुविधाओं के प्रावधान से, पेंशनर्स अपने स्वास्थ्य की बेहतर देखभाल कर पाएंगे, जिससे उनकी जीवन की गुणवत्ता में सुधार होगा।
  4. महंगाई से सुरक्षा: महंगाई भत्ते के प्रावधान से, पेंशनर्स को बढ़ती महंगाई से सुरक्षा मिलेगी, और उनकी पेंशन का वास्तविक मूल्य बना रहेगा।

इसके अलावा, इस सुधार से समाज में वरिष्ठ नागरिकों के प्रति सम्मान भी बढ़ेगा, और यह संदेश जाएगा कि सरकार उनके योगदान को मान्यता देती है और उनकी देखभाल के प्रति प्रतिबद्ध है।

Also Read:
राशन कार्ड वालों की बल्ले बल्ले! 1 अप्रैल से फ्री राशन के साथ मिलेंगे 1000 रुपये Ration Card News

चुनौतियां और आगे का रास्ता

हालांकि, इस प्रस्ताव को लागू करने में कई चुनौतियां हैं:

  1. वित्तीय बोझ: पेंशन राशि में इतनी बड़ी वृद्धि से EPFO और सरकार पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा। सरकार को इसके लिए अतिरिक्त धन की व्यवस्था करनी होगी।
  2. प्रशासनिक चुनौतियां: बढ़ी हुई पेंशन को सही समय पर सभी पात्र पेंशनर्स तक पहुंचाना एक प्रशासनिक चुनौती होगी, विशेष रूप से दूरदराज के क्षेत्रों में।
  3. दीर्घकालिक स्थिरता: EPFO की दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए, संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता है।

इन चुनौतियों के बावजूद, सरकार इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार कर रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने EPS-95 समिति के साथ बैठक में सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है, जिससे आशा जगी है कि आगामी बजट 2025 में इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम उठाया जा सकता है।

EPS-95 पेंशन योजना में सुधार की मांग एक न्यायोचित मांग है, जो लाखों पेंशनर्स के जीवन स्तर को सुधारने के लिए आवश्यक है। यह बदलाव न केवल पेंशनर्स के लिए फायदेमंद होगा, बल्कि यह समाज के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को भी दर्शाएगा।

Also Read:
Airtel ग्राहकों की बल्ले-बल्ले! 84 दिनों वाले 3 नए प्लान में मिलेगा सबकुछ फ्री Airtel 84 Days Recharge Plan

अब सभी की नजरें बजट 2025 पर टिकी हैं, जिसमें इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है। उम्मीद है कि सरकार एक ऐसा समाधान निकालेगी, जो पेंशनर्स की जरूरतों और EPFO की वित्तीय स्थिरता के बीच संतुलन बनाए रखे।

अंततः, EPS-95 पेंशन योजना में बदलाव की यह मांग भारत के सामाजिक सुरक्षा ढांचे में एक महत्वपूर्ण सुधार का प्रतीक है। यदि इसे सही ढंग से लागू किया जाता है, तो यह लाखों रिटायर्ड कर्मचारियों के जीवन में एक महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है, और उन्हें वह सम्मान और सुरक्षा प्रदान कर सकता है, जिसके वे हकदार हैं।

Also Read:
2 मिनट पहले आई खुशखबरी, 10 मार्च से सस्ता गैस सिलेंडर के दाम gas cylinder prices

Leave a Comment

Whatsapp Group