Advertisement

UPI पर लगेगा चार्ज, मुफ्त लेन-देन का दौर खत्म, जानें कितनी देनी होगी फीस? UPI Fees Hike

UPI Fees Hike भारतीय अर्थव्यवस्था में डिजिटल क्रांति का सबसे बड़ा उदाहरण यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) है। पिछले कुछ वर्षों में, UPI ने भारत के कोने-कोने में डिजिटल भुगतान को पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। देश के दूरदराज के इलाकों से लेकर महानगरों तक, छोटे स्ट्रीट वेंडर से लेकर बड़े शॉपिंग मॉल तक, UPI ने भुगतान प्रणाली में एक क्रांतिकारी बदलाव लाया है। लेकिन अब लगता है कि इस मुफ्त सेवा का युग समाप्त होने वाला है।

बदलाव की पृष्ठभूमि

UPI की शुरुआत से ही, इसका मुख्य आकर्षण इसकी निःशुल्क सेवा रही है। सरकार ने इस डिजिटल भुगतान प्रणाली को प्रोत्साहित करने के लिए ₹2000 तक के लेनदेन पर सब्सिडी प्रदान की थी। इससे न केवल UPI का उपयोग बढ़ा, बल्कि डिजिटल इंडिया के सपने को भी बल मिला। हालांकि, अब सरकार धीरे-धीरे इस सब्सिडी को कम कर रही है, जिससे डिजिटल भुगतान कंपनियों को अपने खर्चों की भरपाई के लिए नए रास्ते तलाशने की जरूरत पड़ रही है।

सब्सिडी में कटौती का क्रम

आंकड़ों के अनुसार, सरकार की UPI सब्सिडी में कटौती का क्रम इस प्रकार है:

Also Read:
सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट, अभी देखें आज के नए रेट gold prices
  • 2023: ₹2,600 करोड़
  • 2024: ₹2,484 करोड़
  • 2025: ₹477 करोड़ (सब्सिडी में भारी कटौती)

यह स्पष्ट है कि 2025 तक सब्सिडी में भारी कटौती होगी, जिससे डिजिटल पेमेंट कंपनियों पर वित्तीय दबाव बढ़ेगा।

प्रमुख UPI प्लेटफॉर्म्स द्वारा शुल्क की शुरुआत

इस बदलाव के प्रभाव पहले से ही दिखने लगे हैं। Google Pay, Paytm और PhonePe जैसे प्रमुख डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म्स ने कुछ सेवाओं पर शुल्क लगाना शुरू कर दिया है:

Google Pay

Google Pay ने हाल ही में डेबिट और क्रेडिट कार्ड से किए गए लेनदेन पर 0.5% से 1% तक का शुल्क लगाना शुरू किया है। यह शुल्क विशेष रूप से उन लेनदेन पर लागू होता है जहां UPI के माध्यम से कार्ड से भुगतान किया जाता है।

Also Read:
बीएसएनएल के इन प्लान्स से मिलेगी लंबी वैलिडिटी, जानिए कीमत और फायदे plans of BSNL

Paytm

Paytm ने मोबाइल रिचार्ज, बिजली बिल भुगतान और अन्य प्रीमियम सेवाओं पर शुल्क लेना शुरू कर दिया है। कंपनी का कहना है कि यह शुल्क प्लेटफॉर्म के रखरखाव और सेवा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए आवश्यक है।

PhonePe

PhonePe भी कुछ विशिष्ट सेवाओं पर शुल्क वसूल रहा है। विशेष रूप से, उच्च मूल्य के लेनदेन और निवेश-संबंधित सेवाओं पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जा रहा है।

सरकार पर बढ़ता वित्तीय बोझ

UPI को निःशुल्क बनाए रखने के लिए सरकारी खजाने पर भारी बोझ पड़ता था। विशेष रूप से, पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) लेनदेन पर सरकार को प्रति वर्ष लगभग ₹12,000 करोड़ खर्च करने पड़ते थे। बढ़ती आर्थिक चुनौतियों और अन्य प्राथमिकताओं के मद्देनजर, सरकार के लिए इस स्तर की सब्सिडी जारी रखना कठिन हो गया है।

Also Read:
पेंशन पाने के लिए नए सरकारी नियम लागू, यहां देखें पूरी जानकारी New government rules

आम नागरिकों पर प्रभाव

आज का औसत भारतीय अपने दैनिक लेनदेन का लगभग 60-80% UPI के माध्यम से करता है। इसमें शामिल हैं:

  • मोबाइल रिचार्ज
  • बिजली और पानी के बिल
  • किराने का सामान खरीदना
  • पेट्रोल-डीजल भरवाना
  • इंश्योरेंस प्रीमियम जमा करना
  • ऑनलाइन शॉपिंग
  • घरेलू सेवाओं के लिए भुगतान

अगर इन सभी लेनदेन पर अतिरिक्त शुल्क लगने लगे, तो यह आम जनता के लिए महत्वपूर्ण वित्तीय बोझ बन सकता है। विशेष रूप से, निम्न और मध्यम आय वर्ग के लोगों पर इसका प्रभाव अधिक होगा।

व्यापारियों का दृष्टिकोण

UPI के शुल्क लगने से छोटे व्यापारियों पर भी प्रभाव पड़ेगा। अब तक, UPI का निःशुल्क होना छोटे व्यापारियों के लिए वरदान था। उन्हें न तो POS मशीन खरीदने की आवश्यकता थी और न ही लेनदेन शुल्क का भुगतान करना पड़ता था। लेकिन अगर UPI पर शुल्क लग जाता है, तो व्यापारी या तो यह शुल्क स्वयं वहन करेंगे या उसे ग्राहकों पर स्थानांतरित करेंगे, जिससे वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें बढ़ सकती हैं।

Also Read:
3% DA बढ़ाने का ऐलान, इन कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी increasing DA by 3%

डिजिटल भुगतान के भविष्य पर प्रश्नचिह्न

UPI की सफलता का मूल आधार इसका “मुफ्त और सरल” होना था। इसने नकद रहित अर्थव्यवस्था की दिशा में एक बड़ा कदम था। लेकिन अगर UPI पर शुल्क लग जाता है, तो:

  1. उपयोगकर्ताओं का व्यवहार: कई उपयोगकर्ता वापस नकद भुगतान की ओर लौट सकते हैं, खासकर छोटे लेनदेन के लिए।
  2. बाजार प्रतिस्पर्धा: नए भुगतान प्लेटफॉर्म्स बाजार में प्रवेश कर सकते हैं, जो कम या बिना शुल्क के सेवाएं प्रदान कर सकते हैं।
  3. नवाचार: भुगतान कंपनियां नए राजस्व मॉडल विकसित कर सकती हैं, जहां वे उपयोगकर्ताओं को मूल्य-वर्धित सेवाओं के लिए शुल्क लेते हैं, जबकि बुनियादी लेनदेन मुफ्त रहते हैं।

संभावित समाधान

इस चुनौतीपूर्ण परिदृश्य में, कुछ संभावित समाधान हो सकते हैं:

सरकार द्वारा नीतिगत हस्तक्षेप

सरकार एक संतुलित दृष्टिकोण अपना सकती है, जहां वह कुछ प्रकार के लेनदेन (जैसे छोटे मूल्य के या सामाजिक कल्याण से संबंधित) पर सब्सिडी जारी रख सकती है, जबकि अन्य पर शुल्क की अनुमति दे सकती है।

Also Read:
Jio ने मचाया हड़कंप, आज से मिलेगा अनलिमिटेड 5G डाटा और OTT सब्सक्रिप्शन OTT subscriptions

डिजिटल भुगतान कंपनियों का नया व्यावसायिक मॉडल

कंपनियां अपने राजस्व स्रोतों को विविधता दे सकती हैं। वे विज्ञापन, प्रीमियम सेवाओं, या वित्तीय उत्पादों से आय अर्जित कर सकती हैं, जिससे मूल भुगतान सेवा मुफ्त या कम लागत पर बनी रहे।

तकनीकी नवाचार

नई तकनीक और प्रक्रियाएं लेनदेन की लागत को कम कर सकती हैं, जिससे शुल्क न्यूनतम रखा जा सकता है।

UPI पर शुल्क लगना एक परिवर्तनकारी बदलाव है, जो भारत के डिजिटल भुगतान परिदृश्य को प्रभावित करेगा। हालांकि, यह आवश्यक नहीं है कि यह बदलाव पूरी तरह से नकारात्मक हो। सही नीतिगत ढांचे, नवाचार और उपभोक्ता-केंद्रित दृष्टिकोण के साथ, UPI अभी भी भारत के वित्तीय समावेशन के लक्ष्य को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

Also Read:
चेक बाउंस होने पर इतने साल तक मिलेगी सजा, लागू हुए नए नियम cheque bounces

जैसे-जैसे हम इस नए युग में प्रवेश करते हैं, उपभोक्ताओं, व्यापारियों, भुगतान कंपनियों और नीति निर्माताओं के बीच सहयोग और संवाद की आवश्यकता होगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि डिजिटल भुगतान प्रणाली न केवल वित्तीय रूप से स्थिर रहे, बल्कि सभी के लिए सुलभ और सस्ती भी बनी रहे।

आने वाले महीनों में हम देखेंगे कि UPI इकोसिस्टम इस चुनौती का सामना कैसे करता है और क्या भारत का डिजिटल भुगतान क्षेत्र अपनी विकास गति बनाए रख पाता है। जो भी हो, एक बात स्पष्ट है: UPI ने भारतीय अर्थव्यवस्था में जो परिवर्तन लाया है, वह अभूतपूर्व है, और इसका प्रभाव लंबे समय तक महसूस किया जाएगा, चाहे भविष्य में इसका मॉडल कैसा भी हो।

Also Read:
Income Tax का बड़ा ऐलान! इन PAN Card धारकों पर लगेगा ₹10,000 का जुर्माना

Leave a Comment

Whatsapp Group