drop in gold prices वैश्विक अर्थव्यवस्था इन दिनों एक नाजुक दौर से गुजर रही है। अमेरिका द्वारा हाल ही में घोषित रेसिप्रोकल टैक्स टैरिफ ने न सिर्फ विश्व के शेयर बाजारों को झकझोर दिया है, बल्कि इसका असर कमोडिटी मार्केट पर भी गहराई से पड़ा है। विशेष रूप से उन परिसंपत्तियों पर जिन्हें परंपरागत रूप से ‘सेफ हैवन’ माना जाता रहा है – सोना और चांदी।
पिछले कुछ दिनों में, इन कीमती धातुओं की कीमतों में अप्रत्याशित गिरावट दर्ज की गई है, जिससे निवेशकों के बीच चिंता और भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई है। यह गिरावट एक ऐसे समय आई है जब वैश्विक मंदी की आशंकाएं पहले से ही हवा में तैर रही हैं और अमेरिकी डॉलर अपनी ताकत दिखा रहा है।
भारतीय बाजार में सोने-चांदी में आई गिरावट
सोने में भारी गिरावट
दिल्ली सहित पूरे भारत में सोने की कीमतों में तेज गिरावट देखी गई है। आंकड़े चौंकाने वाले हैं:
- 5 अप्रैल 2025 को, दिल्ली में 24 कैरेट सोना प्रति 10 ग्राम 980 रुपये सस्ता हो गया है।
- इससे एक दिन पहले ही 1,740 रुपये की गिरावट दर्ज की गई थी।
- कुल मिलाकर, केवल दो दिनों में 24 कैरेट सोने की कीमत में 2,720 रुपये प्रति 10 ग्राम की भारी गिरावट आई है।
22 कैरेट सोने की कीमतों में भी लगभग इसी अनुपात में कमी देखी गई है। दो दिनों के भीतर इसकी कीमत में 2,500 रुपये प्रति 10 ग्राम की गिरावट आई है। यह गिरावट ऐसे समय में हुई है जब त्योहारी सीजन और शादी-विवाह का मौसम नजदीक है, जिसमें भारतीय परिवारों द्वारा सोने की भारी खरीदारी की जाती है।
चांदी ने भी धराशायी
चांदी की कीमतों में भी ऐतिहासिक गिरावट देखी गई है:
- दिल्ली में, चांदी का भाव पिछले तीन दिनों में 11,000 रुपये प्रति किलोग्राम गिर चुका है।
- वर्तमान में दिल्ली में एक किलो चांदी 94,000 रुपये में उपलब्ध है, जबकि कुछ ही दिन पहले यह 1.05 लाख रुपये के स्तर को छू रही थी।
चांदी को औद्योगिक उपयोग और निवेश दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि, वर्तमान वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के कारण इसमें लगातार गिरावट जारी है।
प्रमुख शहरों में सोने-चांदी के वर्तमान भाव
दिल्ली में 5 अप्रैल 2025 को ताजा भाव
- सोना (24 कैरेट): ₹90,810 प्रति 10 ग्राम
- सोना (22 कैरेट): ₹83,250 प्रति 10 ग्राम
- चांदी: ₹94,000 प्रति किलोग्राम
भारत के अन्य प्रमुख शहरों में सोने के दाम
मुंबई और कोलकाता:
- 22 कैरेट: ₹83,100 प्रति 10 ग्राम
- 24 कैरेट: ₹90,660 प्रति 10 ग्राम
चेन्नई, बेंगलुरु और हैदराबाद:
- 22 कैरेट: ₹83,100 प्रति 10 ग्राम
- 24 कैरेट: ₹90,660 प्रति 10 ग्राम
पटना:
- 22 कैरेट: ₹83,150 प्रति 10 ग्राम
- 24 कैरेट: ₹90,710 प्रति 10 ग्राम
लखनऊ और जयपुर:
- 22 कैरेट: ₹83,250 प्रति 10 ग्राम
- 24 कैरेट: ₹90,810 प्रति 10 ग्राम
अहमदाबाद:
- 22 कैरेट: ₹83,150 प्रति 10 ग्राम
- 24 कैरेट: ₹90,710 प्रति 10 ग्राम
चांदी की अलग-अलग शहरों में कीमत
जहां दिल्ली, मुंबई और कोलकाता में चांदी ₹94,000 प्रति किलोग्राम पर बिक रही है, वहीं चेन्नई में इसकी कीमत अभी भी ₹1,03,000 प्रति किलोग्राम के उच्च स्तर पर है। यह दर्शाता है कि दक्षिण भारत में चांदी की मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है।
कीमतों में गिरावट के प्रमुख कारण
कमोडिटी बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि सोने और चांदी की कीमतों में इस अभूतपूर्व गिरावट के पीछे कई महत्वपूर्ण कारक काम कर रहे हैं:
1. अमेरिका का टैक्स टैरिफ
अमेरिकी प्रशासन द्वारा लागू किए गए नए रेसिप्रोकल टैक्स टैरिफ ने वैश्विक व्यापार पर गहरा असर डाला है। इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता का माहौल बन गया है, जो कीमती धातुओं के बाजार को भी प्रभावित कर रहा है।
2. अमेरिकी डॉलर की मजबूती
जब अमेरिकी डॉलर अन्य मुद्राओं के मुकाबले मजबूत होता है, तो निवेशक अक्सर सोने से बाहर निकलकर डॉलर में निवेश करना पसंद करते हैं। वर्तमान में डॉलर इंडेक्स में तेजी आई है, जिससे सोने-चांदी पर दबाव बढ़ा है।
3. वैश्विक मंदी की आशंका
अर्थशास्त्रियों के बीच वैश्विक मंदी की आशंकाओं के बीच, निवेशक अपने पोर्टफोलियो को रीबैलेंस कर रहे हैं। कई निवेशक अब नकदी या सुरक्षित शेयरों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे सोने और चांदी की मांग प्रभावित हुई है।
4. मुनाफावसूली
पिछले कुछ महीनों में, सोने ने रिकॉर्ड ऊंचाई छुई थी। कई निवेशक अब अपने मुनाफे को सुरक्षित करने के लिए बिकवाली कर रहे हैं, जिससे कीमतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
5. ब्याज दरों का प्रभाव
केंद्रीय बैंकों, विशेष रूप से फेडरल रिजर्व, द्वारा ब्याज दरों में बदलाव की नीति ने भी कीमती धातुओं के बाजार को प्रभावित किया है। ब्याज दरें ऊंची रहने पर, सोने जैसी गैर-ब्याज अर्जित करने वाली परिसंपत्तियां कम आकर्षक हो जाती हैं।
क्या यह निवेश का सुनहरा अवसर है?
इस भारी गिरावट के बीच, एक महत्वपूर्ण सवाल यह उठता है कि क्या अब सोना और चांदी खरीदने का सही समय है?
दीर्घकालिक निवेशकों के लिए
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आप एक दीर्घकालिक निवेशक हैं, तो वर्तमान कीमतें आकर्षक अवसर प्रदान कर सकती हैं। ऐतिहासिक रूप से, सोना और चांदी ने लंबी अवधि में मूल्य संरक्षण का काम किया है और मुद्रास्फीति के विरुद्ध सुरक्षा प्रदान की है।
एक प्रमुख वित्तीय सलाहकार के अनुसार, “यदि आपका निवेश क्षितिज 5-10 वर्ष या उससे अधिक है, तो वर्तमान गिरावट एक अच्छा प्रवेश बिंदु प्रदान कर सकती है। हालांकि, निवेश करने से पहले अपनी समग्र पोर्टफोलियो रणनीति पर विचार करना महत्वपूर्ण है।”
अल्पकालिक निवेशकों के लिए
अल्पकालिक निवेशकों के लिए, स्थिति अधिक जटिल है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अभी भी अल्पावधि में और गिरावट का जोखिम बना हुआ है। विशेष रूप से अगर वैश्विक आर्थिक स्थितियां और बिगड़ती हैं या अमेरिकी डॉलर और मजबूत होता है।
एक कमोडिटी ट्रेडिंग विशेषज्ञ के अनुसार, “अल्पकालिक व्यापारियों के लिए, तकनीकी संकेतकों पर नज़र रखना और बाजार के रुझानों का अनुसरण करना महत्वपूर्ण है। अभी भी अस्थिरता बनी रह सकती है।”
भौतिक खरीद के लिए
त्योहारी सीजन और शादी-विवाह के मौसम में आभूषणों के लिए सोना-चांदी खरीदने वालों के लिए, वर्तमान कीमतें निश्चित रूप से आकर्षक हैं। पिछले महीने के उच्च स्तरों की तुलना में, अब खरीदारी करना अधिक किफायती है।
ज्वेलरी उद्योग के एक विशेषज्ञ का कहना है, “अगर आप आगामी त्योहारों या शादी के लिए सोने के आभूषण खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो यह अच्छा समय हो सकता है। हालांकि, कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, इसलिए अपनी जरूरतों के अनुसार निर्णय लें।”
आगे की संभावनाएं
सोने और चांदी की कीमतों का भविष्य कई कारकों पर निर्भर करेगा:
- वैश्विक आर्थिक स्थिति: यदि मंदी की आशंकाएं बढ़ती हैं, तो सोना फिर से सुरक्षित निवेश के रूप में आकर्षक हो सकता है।
- केंद्रीय बैंकों की नीतियां: ब्याज दरों में कटौती की संभावना सोने और चांदी के लिए सकारात्मक होगी।
- भू-राजनीतिक तनाव: वैश्विक अस्थिरता आमतौर पर सोने जैसी सुरक्षित परिसंपत्तियों के लिए अच्छी होती है।
- स्थानीय मांग: भारत जैसे देशों में त्योहारी और वैवाहिक मांग एक महत्वपूर्ण कारक रहेगी।
वर्तमान वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में सोने और चांदी की कीमतों में आई तेज गिरावट निवेशकों के लिए चिंता और अवसर दोनों पैदा करती है। हालांकि अल्पावधि में अस्थिरता बनी रह सकती है, दीर्घकालिक दृष्टिकोण से ये कीमती धातुएं अपना महत्व बनाए रखती हैं।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि निवेशकों को अपनी व्यक्तिगत वित्तीय स्थिति, जोखिम सहनशीलता और निवेश लक्ष्यों के आधार पर निर्णय लेना चाहिए। जैसा कि हमेशा कहा जाता है, विविधीकरण किसी भी निवेश रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए।